पूर्व सांसद बोधसिंह भगत ने इस शर्त पर कांग्रेस मिली एंट्री
कैबिनेट मंत्री बालाघाट विधायक गौरीशंकर बिसेन के अहंकार के आगे नतमस्तक भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने पूर्व सांसद बोधसिंह भगत की पार्टी में पुनः एंट्री पर रोक लगा दी है. जिसके चलते अपने लिए राजनीतिक मंच और जमीन तलाश कर रहे भाजपा से निष्कासित पूर्व सांसद बोधसिंह भगत अब कांग्रेस पार्टी का दामन थाम सकते है. जिसकी पुष्टि पूर्व सांसद के करीबी और नेशनल फ्रंट ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामकृपाल खुरसैल ने की है. उन्होंने बताया कि बोधसिंह भगत 03 दिन बाद भोपाल में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समक्ष पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ले सकते है. फिलहाल इस पर संशय बरकरार है कि बोधसिंह भगत ने किन शर्तों के आधार पर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने का फैसला लिया है और कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने के बाद बोधसिंह भगत को कांग्रेस पार्टी आगामी समय में होने वाले विधानसभा चुनाव में कहां से टिकट देती है या फिर लोकसभा चुनाव में उन्हें मौका दिया जाएगा. खैर, अभी चुनावी दौर चल रहा है और नेताओं का दल-बदल करना कोई नई बात भी नहीं है लेकिन बोधसिंह भगत के कांग्रेस में आने से जिले की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा. खासतौर से कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन की राजनीति पर चूंकि जिले में कांग्रेस हो या भाजपा इन दोनों ही प्रमुख दलों में ऐसा कोई नेता फिलहाल तो नहीं जो गौरीशंकर बिसेन को किसी भी तरह से चुनौती देता दिखाई भी देता हो केवल बोधसिंह भगत ही ऐसे नेता माने जाते है जिन्होंने गौरीशंकर बिसेन को ईंट का जवाब पत्थर से दिया. यहीं कारण है कि भाजपा से निष्कासित पूर्व सांसद बोधसिंह भगत को कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व अपने पाले में लाने के लिए बेकरार है ताकि जिले में एकाधिकार का दावा करने वाले गौरीशंकर बिसेन के भ्रम को तोड़ा जा सकें.
बीते कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद बोधसिंह भगत को लेकर काफी चर्चाएं चल रही है. माना जा रहा था कि भाजपा पार्टी से निष्कासित बोधसिंह भगत फिर एक बार पार्टी में शामिल होकर विधानसभा क्षेत्र कटंगी-खैरलांजी से विधायक पद के उम्मीदवार बनाएं जा सकते है और बोधसिंह भगत भी पार्टी में शामिल होकर कटंगी से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. जिसके चलते वह भाजपा के कई बड़े नेताओं से लगातार संपर्क में थे और एक वक्त ऐसा भी लग रहा था कि मानो पार्टी आलाकमान ने बोधसिंह भगत को हरी झंडी भी दिखा दी हो. मगर इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पूर्व सांसद बोधसिंह भगत से अपनी पुरानी रंजिश के चलते उनकी पार्टी में एंट्री पर प्रदेश नेतृत्व के समक्ष ऐतराज जताया. राजनीतिक सूत्रों की माने तो गौरीशंकर बिसेन ने जहां बोधसिंह की एंट्री का विरोध किया वहीं ऐन वक्त पर अपने अंहकार को बचाए रखने के लिए कटंगी के तमाम जमीनी पार्टी पदाधिकारियों की राजनीतिक बलि चढ़ाते हुए उन्होंने गौरव पारधी को कटंगी विधानसभा से उम्मीदवार बनाने की सिफारिस भी कर डाली. चर्चा तो यह भी है कि वारासिवनी निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी में शामिल करवाना चाहते है और इसमें गौरीशंकर बिसेन बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे है इसलिए उनकी दोनों ही शर्तों को को तवज्जों देते हुए बोधसिंह भगत को भाजपा में एंट्री नहीं दी गई और कटंगी के तमाम स्थानीय दावेदारों को छोड़कर कथित रुप से बाहरी गौरव पारधी को कटंगी से पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित कर रही है. फिलहाल बीते 02 वर्षों से कटंगी में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले बोधसिंह भगत अब कांग्रेस में शामिल हो रहे है.
केसर बिसेन और समर्थक कर रहे विरोध-
इधर, जब से बोधसिंह बिसेन के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की चर्चा जोरों से चली है वैसे ही कांग्रेस के लिए लंबे समय से जमीन से जुड़कर कार्य करने वाली और टिकट की प्रबल दावेदार मानी जा रही जिला पंचायत सदस्य केसर बिसेन और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कटंगी ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र बाहेश्वर, तिरोड़ी ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिंह चौहान, भौरगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष विनय जायसवाल और अन्य समर्थकों के साथ भोपाल के इंदिरा भवन पहुंच गई. यहां कांग्रेस के तीनों ही ब्लॉक अध्यक्ष ने भाजपा से निष्कासित पूर्व सांसद बोधसिंह भगत को कांग्रेस पार्टी में शामिल किए जाने पर अपना विरोध जताया है. कटंगी कांग्रेस की एक जमीनी हकीकत यहीं है कि यहां पर जिला पंचायत सदस्य केसर बिसेन ने कांग्रेस पार्टी के लिए और अपना राजनीतिक वर्चस्व तैयार करने के लिए दिन रात मेहनत की है. वह अब तक कांग्रेस की तरफ से कटंगी की विधायक पद की सबसे प्रबल दावेदार के रूप में देखी जा रही है हालांकि जब से बोधसिंह भगत के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा चल रही है. उससे केसर बिसेन और उनके समर्थक बेहद नाराज है और प्रदेश नेतृत्व से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की गुहार लगा रहे है. वहीं कांग्रेस के तीनों ही मंडल अध्यक्षों से साफ कर दिया है कि अगर बाहरी व्यक्ति साफ तौर पर कहें तो बोधसिंह भगत को पार्टी कटंगी से टिकट देती है तो पार्टी के यह संगठन पदाधिकारी काम नहीं करेंगे. यह तीनों ही मंडल अध्यक्ष कांग्रेस से केसर बिसेन को योग्य उम्मीदवार मानते है.
गौरतलब हो कि तीसरी बार जिला पंचायत सदस्य बनने वाली केसर बिसेन को कांग्रेस ने जिला पंचायत बालाघाट में अध्यक्ष पद का अधिकृत उम्मीदवार बनाया था लेकिन पार्टी के ही अन्य समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने सम्राट सिंह सरस्वार को सहयोग देकर जिला पंचायत का अध्यक्ष चुना लेकिन इसके बावजूद केसर बिसेन विधायक पद की दावेदारी और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते लगातार कटंगी में पार्टी के लिए सक्रियता से काम कर रही है. कांग्रेस पार्टी के तमाम अभियान को घर-घर तक पहुंचाने के लिए सतत जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ मैदानी तैयारी करती रही है. उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि इस बार पार्टी उन्हें विधायक का उम्मीदवार बनाएंगी लेकिन जब से बोधसिंह भगत के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेज हुई है केसर बिसेन की मुश्किलें भी बढ़ गई है चूकिं बालाघाट की 06 विधानसभा सीटों में लांजी से हीना कावरे और बालाघाट से अनुभा मुंजारे की टिकट लगभग तय मानी जा रही है अब तीसरी महिला दावेदार केसर बिसेन को टिकट मिलेगा या नहीं इसे लेकर संशय और आम जन के बीच खासी चर्चा चल रही है.
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