बड़े तालाब का सीमाकंन हुआ शुरू अतिक्रमण की जद में तालाब का बड़ा हिस्सा, करीब 10 एकड़ तालाब का हिस्सा गायब





कटंगी।

   गुरूवार से राजस्व एवं नगर परिषद के अमले ने शहर के बड़े तालाब के सीमाकंन का कार्य प्रांरभ कर दिया गया है. तालाब के सीमाकंन की शुरूआती कार्रवाई में कई जगहों पर अतिक्रमण किया जाना पाया गया है हालाकिं अभी पूरे तालाब का सीमाकंन नहीं होने के कारण कितनी भूमि पर अतिक्रमण है यह स्पष्ट नहीं हो पाया है. सीमाकंन की कार्रवाई वार्ड क्रंमाक 04 वाले हिस्से से शुरू की गई और दोपहर करीब 1 बजे तक वार्ड क्रंमाक 13 के कुछ हिस्से का सीमाकंन किया गया. अब शुक्रवार को पुनः आगे के सीमाकंन की कार्रवाई शुरू की जाएगी. सीमाकंन की कार्रवाई के दौरान 5 पटवारी, एक राजस्व निरीक्षक और नगर परिषद के उपयंत्री के साथ नगर परिषद का अमला मौजूद रहा. तालाब की सीमाकंन की कार्रवाई में 3 दिन का समय लगने का अनुमान है. बहरहाल, आज पहले दिन की कार्रवाई के बाद तालाब के कुछ हिस्से के अतिक्रमण का पता लगा है. 

10 एकड़ तालाब का हिस्सा गायब-

  इस सीमाकंन की शुरूआती कार्रवाई के बाद तालाब के क्षेत्रफल को लेकर मछुआरा सहकारी समिति कटंगी पदाधिकारी हरिप्रसाद ने सवाल खड़े किए है. दरअसल, नगर परिषद के पास इस तालाब का क्षेत्रफल नजूल सीट क्रंमाक 05 बी प्लाट नंबर 1 में रकबा 10.55 हेक्टेयर यानि करीब 26 एकड़ है जबकि मछुआरा समिति का दावा है कि वर्ष 1914-15 के मुताबिक तालाब का क्षेत्रफल 15.28 हेक्टेयर यानि करीब 37.76 एकड़ है. अगर, समिति के लिहाज से देखे तो करीब 10 एकड़ के तालाब का हिस्सा शासकीय दस्तावेज से ही गायब है. इस हिस्से को लेकर अब नया विवाद बन सकता है. फिलहाल मछुआरा सहकारी समिति सीमाकंन की कार्रवाई को लेकर असंतुष्ठ जरूर है किन्तु समिति पदाधिकारियों का कहना है कि पूर्ण सीमाकंन होने पर अगर तालाब का क्षेत्रफल पूर्व की भांति 1914-15 के रिकार्ड अनुसार दुरस्त नहीं किया जाता तो वह वरिष्ट अधिकारियों से मामले की शिकायत करेगें. वहीं जनपद सदस्य अंजु शर्मा ने कहा कि अगर तालाब का सीमाकंन ठीक तरीके से नहीं होता और मछुआरा समिति के रिकार्ड के अनुसार तालाब का क्षेत्रफल पर काम नहीं होगा तो जन आंदोलन किया जाएगा.

तालाब के सुदृढ़ीकरण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत-

      ज्ञात हो कि बड़े तालाब के सुदृढ़ीकरण के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन विधायक के.डी.देशमुख ने राज्य सरकार से नगर परिषद को 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करवाई थी. जिसकी पहली किस्त 1 करोड़ रुपए नगर परिषद के पास आकर जमा थी. किन्तु नगर परिषद और राजस्व विभाग तालाब के हस्तांतरण की कार्रवाई में गंभीरता दिखाने की बजाए फाईल को दबाकर बैठे हुए थे. विगत माह जब मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने तालाब के मुद्दे को लेकर जनसहयोग से आवाज बुंलद की और नगर परिषद में एक बैठक का आयोजन पूर्व विधायक के.डी.देशमुख की उपस्थिती में आहुत करवाई तब जाकर पूरा मामला सामने आया और आनन-फानन में 3 वर्षों से अटकी हस्तांतरण की फाईल सामने आई और 26 अप्रैल को नगर परिषद को तालाब हस्तातंरण की कार्रवाई पूरी हुई जिसके बाद 06 मई को नगर परिषद ने किरनापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से तालाब का भूमिपूजन करवाया है और सीमाकंन की कार्रवाई भी शुरू की है हालाकिं अभी नगर परिषद ने तालाब के सुदृढ़ीकरण को लेकर निविदा आमंत्रित नहीं की है. 

मछुआरा सहकारी समिति कई बार सीमाकंन की कर चुकी मांग-

     उल्लेखनीय है कि मछुआरा सहकारी समिति मर्यादित कटंगी क्रंमाक 748 के द्वारा तालाब के सीमाकंन की मांग को लेकर बीते कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे. जिसके चलते नगर परिषद कटंगी, अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं कलेक्टर कार्यालय में आवेदन भी किए गए पंरतु विभाग ने कभी सीमाकंन की कार्रवाई को तवज्जों नहीं दी. समिति के आवेदनों पर अफसरों ने जब कोई विचार नहीं किया तो समिति ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की और इन शिकायतों को भी अफसरों ने बड़ी चालाकी से बंद करवा दिया. जिस वजह से तालाब के सीमाकंन का कार्य अटका रहा. वहीं तालाब के आस-पास लगातार अतिक्रमण पांव पसारते रहा और अब जब 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तालाब के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदान की गई 2 करोड़ रुपए की राशि को लेकर सवाल खड़े होने लगे तो कुंभकर्णीय नींद में सोए नगर परिषद के अफसर भागा-दौड़ी कर रहे है. ताजुब की बात तो यह है कि नगर परिषद में फाईलों को दबाने का काम उपयंत्री और लेखापाल करते है और वरिष्ट अफसरों की डांट-फटकार सीएमओ को सुननी पड़ती है पंरतु इसके बावजूद सीएमओ के मातहत इन कर्मचारियों खिलाफ आज तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं हो पाई है. 

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