राजस्व और नगर परिषद ने बड़े तालाब को किया बर्बाद हस्तातंरण की कार्रवाई आज तक अटकी नगर परिषद खर्च करती रही राशि
कटंगी।
नगर के हद्वय स्थल में स्थित बड़े तालाब को बर्बाद करने में राजस्व और नगर परिषद की बड़ी भूमिका सामने आ रही है. जल संसाधन विभाग, राजस्व के ही सरकारी दस्तावेज इस बात के पुख्ता प्रमाण है. इन दस्तावेजों से प्रतीत होता है कि शुरू से ही राजस्व विभाग तथा नगर परिषद ने बड़े तालाब के संरक्षण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई. एक तरफ जहां बीते एक दशक से इस तालाब के सौन्दर्यीकरण और गहरीकरण की मांग मछुआरों और नागरिकों के द्वारा की जा रही है और जल संसाधन विभाग (सिंचाई विभाग) उप सचिव ने वर्ष 2019 में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को एक पत्र लिखा है जिसमें उपसचिव ने स्पष्ट किया है कि तालाब में अतिक्रमण होने की वजह से तालाब सिंचाई की दृष्टि से उपयोगी नहीं है जिस कारण तालाब को नगर परिषद को हस्तांतरित करने का प्रशासकीय निर्णय लिया गया है. मगर, इन 4 सालों में राजस्व विभाग तालाब को नगर परिषद को हस्तांतरित नहीं करवा पाया है. वहीं नगर परिषद इस तालाब में बिना किसी अधिकार के ही विगत कुछ वर्षों में हजारों रुपए की राशि सफाई के नाम खर्च कर चुकी है किन्तु राशि खर्च करने के बावजूद तालाब की हालत जस के तस है. अभी मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जब जनसहयोग से तालाब की सफाई और गहरीकरण का कार्य करवा रहा है तो राजस्व अधिकारी एसडीएम और नगर परिषद सीएमओ बाधक बने हुए है.
तालाबों को लेकर एप्को ने नगर परिषद को लिखे पत्र-
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) की मुख्य वौज्ञानिक अधिकारी डॉ विनीता विपट ने वर्ष 2017 में नगर परिषद कटंगी को एक विभागीय पत्र लिखा जिसमें उल्लेख है कि जल के अत्यधिक दोहन और प्रदूषण के कारण तालाब दूषित होते जा रहे है. इस संबंध में केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं. जलीय निकायों के संरक्षण हेतु वेटलैण्ड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम (2010 एवं 2017) भी अधिसूचित किए गए हैं जिसके अंतर्गत तालाब एवं वेटलैण्ड के संरक्षण हेतु विशेष पहल की गई है. इनको बचाने के लिये एकीकृत, समन्वित एवं तकनीकी प्रयासों की आवश्यकता है. राज्य शासन की “शहरी जलीय निकायों के पर्यावरणीय संरक्षण“ योजनांतर्गत एप्को द्वारा तालाबों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिये अनुदान राशि दी जाती है. नगर परिषद कटंगी अपने क्षेत्र में स्थित तालाबों के पर्यावरण संरक्षण हेतु परियोजना प्रस्ताव या विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन एप्को को शीघ्र भेजें पंरतु नगर परिषद कटंगी ने तब कोई प्रस्ताव एप्को को नहीं भेजा वहीं पुनः एप्को ने 21 फरवरी 2018 को एक पत्र और भेजा जिसमें उसने स्पष्ट किया कि नगर परिषद ने अब तक कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है. जो यह समझने के लिए काफी है कि उस वक्त नगर परिषद में बैठे जनप्रतिनिधि अध्यक्ष और पार्षद से लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी शहर के तालाबों के सौन्दर्यीकरण को लेकर गंभीर नहीं थे. यह वहीं जनप्रतिनिधि है जो आज मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की पहल पर रोड़ा अटका रहे है.
हस्तांतरण की कार्रवाई आज भी अधूरी-
नगर परिषद तालाब की सफाई एवं गहरीकरण को लेकर किस तरह लापरवाही बरतते आई है. इस बात को इससे भी समझना आसान हो जाता है कि जल संसाधन विभाग (बैनगंगा संभाग) बालाघाट के कार्यपालन यंत्री ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को मार्च 2019 में एक पत्र लिखा है जिसमें कटंगी नजूल तालाब (बड़ा तालाब) को हस्तातंरित करने की कार्रवाई करते हुए अवगत कराने के लिए कहा था पंरतु इन 4 सालों में यह कार्रवाई पूर्ण नहीं हो पाई आज भी हस्तातंरण की कार्रवाई लंबित है और नगर परिषद सीएमओ से लेकर लेखापाल तथा उपयंत्री झूठ बोल रहे है कि वह तालाब के गहरीकरण के लिए टेडर की प्रक्रिया पूरी कर रहे है बड़ा सवाल तो यह है कि जब तालाब हस्तांतरित नहीं हुआ है तो नगर परिषद टेंडर किस नियम से लगा रही है. खैर, यह विभागीय मसला है पंरतु यह तो तय हो चुका है कि इस वर्ष भी बड़ा तालाब की साफ-सफाई और गहरीकरण कराने की नियत नगर परिषद की नहीं है.
मुख्यमंत्री ने दिए 2 करोड़-
बड़े तालाब के संरक्षण को लेकर एक तरफ जहां नगर परिषद और राजस्व विभाग लापरवाही बरतता रहा. वहीं पूर्व विधायक के.डी.देशमुख ने नागरिकों की मांग को तवज्जो देते हुए राज्य सरकार से वर्ष 2018 में तालाब के गहरीकरण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करवा ली. जिसमें 1 करोड़ रुपए की राशि नगर परिषद को प्रदान भी की जा चुकी है लेकिन नगर परिषद राशि मिलने के बाद भी कुंभकर्णीय नींद में सोई रही अभी हाल ही में जब मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने तालाब के गहरीकरण एंव साफ-सफाई को लेकर जनसहयोग से पहल शुरू की और पूर्व विधायक ने नगर परिषद सीएमओ, उपयंत्री को फटकार लगाई तब नपा को होश आया कि शासन से मिली राशि का उपयोग करना है पंरतु राशि खर्च करने के पहले का खाका तक तैयार नहीं कर पाई है.
अतिक्रमण ने घेरा तालाब-
शहर के बड़े तालाब की सूरत आज अतिक्रमण ने बिगाड़ कर रखी हुई है कई रसूखदारों ने तालाब पर कब्जा कर लिया है. जिसके चलते नागरिक तालाब का सीमांकन कराने की मांग कर रहे है. बीते दिनों एसडीएम ने भरोसा दिया था कि तालाब का सीमाकंन करवाया जाएगा लेकिन एसडीएम भी शायद सीमाकंन कराना भूल गई है.


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